NCERT Solutions for Class 10 Hindi Path-10: Naubatkhane Mein Ibadat
'नौबतखाने में इबादत' यतींद्र मिश्र द्वारा रचित शहनाई-सम्राट उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर आधारित एक जीवनीपरक रेखाचित्र है, जिसमें उनके संगीत के प्रति समर्पण, काशी से उनके गहरे जुड़ाव, तथा उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली का वर्णन है।
पाठ का सार एवं मुख्य बिंदु
पाठ्यपुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न: बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई-साधना का काशी से क्या संबंध था?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ का बचपन काशी में बीता, जहाँ वे प्रतिदिन बालाजी मंदिर की नौबतखाने में शहनाई का अभ्यास करते थे। काशी और गंगा नदी के प्रति उनका गहरा आध्यात्मिक लगाव उनके संगीत का अभिन्न हिस्सा बन गया।
प्रश्न: लेखक ने बिस्मिल्ला खाँ के संगीत को 'इबादत' क्यों कहा है?
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ के लिए शहनाई वादन केवल एक कला नहीं, बल्कि ईश्वर की आराधना यानी 'इबादत' के समान था। वे अपने संगीत साधना को पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव से करते थे, जैसे कोई व्यक्ति नमाज़ अदा करता है।
प्रश्न: इतने प्रसिद्ध होने के बावजूद बिस्मिल्ला खाँ का जीवन कैसा था?
उत्तर: भारत रत्न सहित अनेक सम्मान प्राप्त करने के बावजूद बिस्मिल्ला खाँ का जीवन अत्यंत सरल और साधारण रहा। वे आजीवन काशी से जुड़े रहे और भौतिक ऐश्वर्य के बजाय संगीत साधना और सादगी को ही प्राथमिकता देते रहे।
प्रश्न: यह पाठ हमें क्या शिक्षा देता है?
उत्तर: यह पाठ सिखाता है कि सच्ची कला और साधना समर्पण, श्रद्धा और निरंतर अभ्यास से ही सिद्ध होती है, तथा वास्तविक महानता व्यक्ति की सादगी और उसकी जड़ों से जुड़े रहने में निहित होती है, न कि दिखावे या भौतिक संपन्नता में।